बुधवार, ११ मे, २०१६

Fonts फॉण्ट

फॉण्ट
देवनागरी के फॉण्ट दो प्रकार के हैं। एक तो पुराने लिगेसी नॉन-यूनिकोड फॉण्ट दूसरे यूनिकोड फॉण्ट

नोट - वाँछित फॉण्ट के लिंक तक आसानी से पहुँचने के लिये अपने ब्राउजर में Ctrl+F कीबोर्ड शॉर्टकट दबायें और सर्च बॉक्स में हिन्दी या अंग्रेजी में फॉण्ट का नाम लिखें।

यूनिकोड फॉण्ट

विण्डोज़ का डिफॉल्ट हिन्दी फॉण्ट मंगल होता है। इसके अलावा विण्डोज़ विस्टा/७  में अपराजिता, कोकिला तथा उत्साह नामक फॉण्ट सम्मिलित हैं। इसके अलावा विण्डोज़ के ऍरियल यूनिकोड ऍमऍस नामक फॉण्ट में हिन्दी सहित संसार की सभी यूनिकोडित भाषा लिपियों के वर्ण-चिह्न शामिल हैं। कुछ प्रचलित हिन्दी फॉण्टों का विवरण निम्नलिखित है:-

मंगल — यह विण्डोज़ 2000 के जमाने से विण्डोज़ प्रचालन तन्त्र का डिफॉल्ट फॉण्ट है। यह सेंस सेरिफ है इसलिये स्क्रीन रीडिंग हेतु उत्तम है यानि स्क्रीन पर इसमें पाठ सुपठनीय होता है लेकिन प्रिंट लेने, ग्राफिक्स कार्य या pdf बनाने के लिये उपयुक्त नहीं है क्योंकि इन कार्यों में इसका रूप बदसूरत दिखता है।

Arial Unicode MS — माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस के साथ इंस्टॉल होने के कारण लगभग हर विण्डोज़ कम्प्यूटर में मिल जाता है। कोई और फॉण्ट न होने पर उपर्युक्त प्रिंट/ग्राफिक्स सम्बन्धी कार्यों के लिये मंगल की जगह इसे प्रयोग कर सकते हैं।

विण्डोज़ 7, 8 तथा 10 में आपको अपराजिता (बैनर या लेख के मुख्य शीर्षक आदि के लिये उपयुक्त, सामान्य पाठ के लिये नहीं), कोकिला (दिखने में कुछ हद तक चाणक्य जैसा) तथा उत्साह (दिखने में Krutidev 010 जैसा) आदि फॉण्ट इनबिल्ट मिलेंगे। इनमें शीर्षक के लिये अपराजिता, सामान्य पाठ के लिये कोकिला तथा ज्यादा बारीक टैक्स्ट के लिये उत्साह उपयुक्त है।

लोहित देवनागरी — यह लिनक्स प्रचालन तन्त्र का डिफॉल्ट हिन्दी फॉण्ट है। यह स्क्रीन रीडिंग के लिये अच्छा फॉण्ट है, साथ ही प्रिंट भी ठीक ही आता है। मुक्त स्रोत होने से यह निरन्तर अद्यतन होता रहता है।

सकलभारती — सकलभारती सी-डॅक द्वारा विकसित एक यूनिकोड फॉण्ट है जिसमें 13 भाषा लिपियाँ शामिल हैं जो कि 22 भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी को कवर करती हैं। यह भारतीय भाषाओं के लिये एक यूनिवर्सल फॉण्ट के तौर पर विकसित किया जा रहा है ताकि सभी भारतीय भाषायी सरकारी कार्यों में केवल इस एक फॉण्ट का उपयोग हो सके। भारतीय भाषाओं में बहुभाषी पाठ के लिये यह उपयोगी है। बहुभाषी पाठ में अलग-अलग भाषायी फॉण्टों का उपयोग करना पड़ता है जिससे पाठ के प्रदर्शन और मुद्रण में एकरूपता नहीं रहती। यह फॉण्ट इस समस्या का समाधान करता है। सीडॅक की साइट पर फॉण्ट का विवरण यहाँ पढ़ें। फॉण्ट की ttf फाइल साइट से सीधे डाउनलोड की जा सकती है जबकि सोर्स कोड प्राप्त करने के लिये सत्यापन की लम्बी प्रक्रिया है।

संस्कृत २००३ — संस्कृत पाठ के लिये संस्कृत २००३ फॉण्ट श्रेष्ठ है। इसका प्रिंट बड़ा सुन्दर आता है लेकिन फॉण्ट साइज ज्यादा छोटा हो तो स्क्रीन पर पढ़ने में दिक्कत आती है क्योंकि अक्षर मोटे होते हैं। sanskritdocuments.org साइट संस्कृत टैक्स्ट प्रदर्शन हेतु इसका उपयोग करती है। संस्कृत की मोटे अक्षरों में छपाई के लिये यह बेहतरीन विकल्प है। पहले यह एकमात्र फॉण्ट था जिसमें सर्वाधिक देवनागरी संयुक्ताक्षर एवं वर्णखण्ड (ग्लिफ्स) शामिल थे, हालाँकि इसमें अभी यूनिकोड में जुड़े नवीनतम वैदिक चिह्न शामिल नहीं किये गये हैं।

सिद्धान्त — संस्कृत के लिये सिद्धान्त नामक फॉण्ट भी उल्लेखनीय है क्योंकि यह एकमात्र फॉण्ट है जिसमें यूनिकोड कूटबद्ध सर्वाधिक देवनागरी वर्ण (वैदिक स्वर चिह्नों समेत) सम्मिलित हैं। यदि आपको वैदिक टैक्स्ट में काम करना है तो यह सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प है।

डाउनलो़ड
संस्कृत


नॉन-यूनिकोड फॉण्ट

ये पुराने ८-बिट फॉण्ट हैं जो कि यूनिकोड मानक के प्रचलन से पहले प्रयोग किये जाते थे। वर्तमान में इनका उपयोग मुख्यतः ग्राफिक्स तथा छपायी के कार्यों हेतु ही किया जाता है। नॉन-यूनिकोड फॉण्टों में टाइप करने हेतु ई-पण्डित आइऍमई नामक औजार उपलब्ध है। कुछ प्रचलित नॉन-यूनिकोड फॉण्टों का विवरण निम्नलिखिति है:-
 
कृतिदेव — यह ग्राफिक्स के कार्यों में बहुधा प्रयोग होता है। इस शृंखला के कई फॉण्ट हैं जिनका कीबोर्ड लेआउट तथा कैरैक्टर मैप समान है। इस शृंखला के दो मुफ्त फॉण्ट कृतिदेव 010 तथा कृतिदेव 011 हैं।
 
चाणक्य — यह छपाई के लिये सर्वाधिक लोकप्रिय हिन्दी फॉण्ट है। यह कई समाचार पत्रों तथा पत्रिकाओं के प्रकाशन हेतु प्रयोग होता है। इसके अतिरिक्त कई पुस्तकों के प्रकाशन हेतु भी इसका उपयोग होता है। गीताप्रैस गोरखपुर एक प्रमुख प्रकाशक है जो इसका उपयोग करता है। दैनिक भास्कर आदि विभिन्न समाचार पत्रों ने इसके आधार पर अपने भास्कर फॉण्ट तैयार करवाये हैं जिनका कैरैक्टर मैप इसके जैसा ही है। 4C के कई फॉण्ट भी इसके जैसे दिखने वाले और इसके जैसे कैरेक्टर मैप वाले हैं। चाणक्य टाइप करने हेतु कई IME (टाइपिंग टूल) का प्रयोग होता है जिनमें ४सी लिपिका (4C Lipika) शामिल है। चाणक्य के विभिन्न जगह कई संस्करण प्रचलित हैं। इनमें संस्करण का उल्लेख न होने से भ्रम की स्थिति रहती है।

वॉकमैन-चाणक्य — यह फॉण्ट दिखने में काफी हद तक चाणक्य जैसा होता है लेकिन कैरैक्टर मैप बिलकुल अलग होता है। यह भी पुस्तकों के प्रकाशन में प्रयुक्त होता है। इसके कई वैरियेंट हैं जैसे 901, 902, 905 इत्यादि।
 
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काम की कड़ियाँ

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