मित्रांनो, आपण मुंबई पुणे रेल्वेने प्रवास करतांना खोपोली जवळ मोठमोठे पाइप खाली गेलेले बघतो , हे काय आहे त्यामागची कथा
नुसेरवान टाटा आपला मुलगा जमशेट व फँमिली सह नवसारीहून व्यवसाय करण्याकरिता मुंबई येथे १८४७ साली आले. तेव्हां जमशेट ८ वर्षांचा होता. दूरदृष्टी हा टाटा घराण्याचा वारसाच, पुढे कशाची गरज पडेल, काय केले पाहीजे हे त्यांना फार आधीच कळते.
१९०२ च्या नोव्हेंबर मधे जमशेटजी टाटा लॉर्ड हँमिल्टन यांना वळवण वीज प्रकल्पाचा प्रस्ताव घेऊन भेटले. मुंबई ची विजेची वाढती मागणी,गरज या सर्वाचा यांत विचार केला होता. परंतु या प्रस्तावास परवानगी मिळून काम चालू करण्यांस १९१० साल उजाडले. १९१० साली जमशेटजी नी २ कोटी रूपये भांडवल उभे करून फेब्रुवारी १९११ ला कामाला सुरवात केली. ७फूट व्यासाच्या पाइप मधून खंडाळा लोणावळा येथे पडणारे तुफान पावसाचे पाणी १८०० फूट ऊंचीवरून खाली खोपोली येथे ७ पाइप लाइन टाकुन आणायचे, तेथे जनित्राद्वारे विज निर्माण करावयाची व ती मुंबई ला पोहोचवायची अशी ही योजना होती. त्याकरता वळवण येथे दोन धरणे बांधून पाणी साठा वाढवायचा की जेणेकरून वर्षभर विज निर्मिती चालु राहील.
१९११ मधे शुभारंभ झाल्यावर दुसऱ्याच दिवशी ७ हजार मजुर खंडाळा लोणावळ्याच्या डोंगरदऱ्यांत रात्रंदिवस कामाला लागले. सरळ सुळके,गर्द झाडी यातुन पाइप वर चढवणे,उतरवणे, परत योग्य जागी जोडणे असे सर्व उच्च दर्जाचे काम चालु झाले. १९११ साली केलेल्या या कामांत आजही कोठे गळती नाही, की कोणचाही पाइप फुटला नाही.
प्रचंड वेगाने कित्येक वर्षे या पाइपातुन पाणी येत आहे व विज निर्मिती होत आहे. हे पाइप जर्मनीहून आणले होते, जनित्राची चक्रे स्वित्झर्लड हून आणली,जनित्र अमेरिकेहून, विज वाहुन नेणाऱ्या तारा इंग्लडहून आणल्या. हे सर्व टाटा कंपनीच्या लोकांनी ४ वर्षात पुर्ण केले. १९१५ मधे लॉर्ड विलींग्टन यांनी खोपोलीत कळ दाबल्यानंतर मुंबई च्या सिप्लेक्स गिरणीत दिवे लागले.
१९११ साली दळणवळणाची साधने, उपजत टेक्नॉलॉजी, परिस्थिती, कम्युनिकेशनच्या सोयी या सर्वांचा विचार केला तर ह्या अफाट कामाची व दूरदृष्टी ची टाटांची समज किती मोठी होती हे लक्शात येते.
टाटा ,भारतीयांसाठी ही केवळ दोन अक्शरे नाहीत, त्यांच्या साठी हे आहे लक्ष्मीचं दुसरे नांव. संपत्ती निर्मिती हा टाटांचा उद्देश कधीच नव्हता उलट समाजाकडून आलेले पैसे समाजालाच परत करावयाचे हे त्यांचे धोरण होते.
बुधवार, २ डिसेंबर, २०१५
टाटा
● जन्म दुसऱ्याने दिला.
● नाव दुसऱ्याने दिले.
● शिक्षण दुसऱ्या कडून घेतले.
● लग्न दुसऱ्याने जुळवले.
● कामावर दुसऱ्याने लावले.
●
शेवटी स्मशनातही दुसरेच नेणार ...
तरीही माणूस इतका घमंड का करतो?
आयुषात एकदाचं मिळतात.
■ आई वडील
■ शरीर
■ तारूण्य
आयुष्यात विचार करुन करावे.
■ प्रेम
■ बोलणं
■ निर्णय
आयुष्यात कोणाचीही वाट बघतं नाहीतं.
■ मृत्यु
■ वेळ
■ वय
आयुष्यात छोट्या समजु नये.
■ कर्ज
■ वचन
■ रोग
आयुष्यात खुप त्रास देतात.
■ मित्र
■ बायको
■ प्रेयशी
मृत्यू नंतरही टिकतात
■ डोळे - ३१ मिनिटे
■ मेंदू - १० मिनिटे
■ पाय - ४ तास
■ त्वचा - ५ दिवस
■ हाडे - ३० दिवस
■ नातं - आयुष्यभर
दोनच गोष्टी कराव्यात.
■ दोस्ती केली तर मरे पर्यंत
■ दुश्मनी केली तर विषय संपवे पर्यंत
● घर विकत घेऊ शकता पण त्या घराचे घरपण नाही.
● घड्याळ विकत घेऊ शकता
पण गेलेली वेळ नाही.
● मोठे पद विकत घेऊ शकता पण आदर नाही.
● मखमली गादी विकत घेऊ शकता पण शांत झोप नाही.
● पुस्तके विकत घेऊ शकता पण विद्या नाही.
● औषधे विकत घेऊ शकता पण चांगले आरोग्य नाही.
● रक्त विकत घेऊ शकता पण कोमेजून जात असलेले जीवन नाही.
● पैसा हेच सर्वस्व नाही पैसा जरुर कमवावे
पण त्यासाठी आयुष्यातले सुंदर क्षण गमावू नये.
● पैश्याची पूजा जरूर करावी पण पैश्याचे गुलाम बनू नये.
● माणसासाठी पैसा बनला आहे. पैश्यासाठी माणूस नाही.
● आपले मित्र हे आपले धन आहे.
● वेळ काढा भेटा बोला.
इजराइल एक ऐसा छोटा सा देश जिसकी जनसँख्या 80 लाख के आस पास है पर 150 करोड़ से अधिक 56 मुस्लिम देश इजराइल से खौफ खाते हैं - ताजा उदहारण ISIS पुरे अरब में आतंक मचाये हुए है, लोगों का कत्लेआम कर रहा है, पर अब तक इजराइल की तरफ एक गोली भी नहीं चलाई है, जबकि इजराइल सीरिया का पडोसी ही देश है, एक भी इजराइल के नागरिक को छुआ भी नहीं, क्योंकि उनको पता है जहाँ इजराइल को थोडा भी छेड़ा, उनके यहाँ कोई मानवाधिकार वाला बकवास करने के लिए नहीं अगले ही पल या तो इजराइल की ओर से मिसाइल दाग दिया जायेगा या इसरायली सेना चढ़ाई कर देगी - इजराइल का ये रुतबा ऐसे ही नहीं बना है...!!
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बात है इजराइल के बनने की, जब हिटलर से जान बचाकर यहूदी लोग इजराइल पहुचे थे और इजराइल बनाया था, अरब के मुस्लिमो ने पहली बार इजराइल पर 1948 में हमला किया था उस समय बस इजराइल बना ही था, उसके पास कोई बड़ी सेना या धन गोला बारूद नहीं था, परंतु फिर भी इजराइल ने अरब को 1948 में बड़े आसानी से हरा दिया तब से लेकर अब तक अरब देशों ने 6 बाद इजराइल से युद्ध लड़े हैं और इजराइल ने हर बार मुस्लिम देशो को हराया है - अगर आंकड़ो की बात करे तो 1948 से अब तक अरब-इजराइल युद्धों में इजराइल के 22000 सैनिक शहीद हुए हैं वहीँ मुस्लिम देशों के 91000 से अधिक...!!
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इजराइल ऐसा देश है जिसका नक्शा आप देखें, चारो ओर से मुस्लिम देशों से घिरा हुआ है फिर भी किसी मुस्लिम देश, या ISIS की मजाल नहीं की इजराइल को छेड सके अगर यूँ कहा जाए की इजराइल, मुस्लिम देशों का काल है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी इजराइल इसलिए इतना ताकतवर है क्योंकि वहां के लोगो में दुश्मनो के प्रति मानवाधिकार जैसे बकवास चीजे नहीं है और एक बात मित्रो इजराइल खुद पहले हमला नहीं करता, बस उसको कोई छेड़े तो इजराइल उसे छोड़ता नहीं -
इजराइल की मोसाद का तो ऐसा खौफ है की मोसाद के डर से किसी आतंकी संगठन के मुखिया या किसी मुस्लिम देश के नेता की औकात नहीं की इजराइल की तरफ टेढ़ी आँख करके देखे मित्रो म्युनिक ओलिंपिक में जिहादी तत्वों ने इजराइल के खिलाडियों की जर्मनी में हत्या कर दी थी और वो जिहादी तत्व किसी मुस्लिम देश में जा छुपे थे, जिनकी संख्या सैंकड़ो में थी इजराइल की मोसाद के 30 जवान उस मुस्लिम देश में घुसकर उन जिहादियों को मार आये थे इजराइल की मोसाद का सिर्फ एक जवान शहीद हुआ था...!!
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एक बार एक मुस्लिम संगठन के लोगो ने कुछ इसरायली लोगो की हत्या कर दी फिर सब फरार हो गए सबसे अपना देश और नाम हुलिया बदल दिया, पर इजराइल की मोसाद इतनी खौफनाक है, उन कातिलों को दक्षिण अमरीका के होटल में जाकर ख़त्म कर दिया -
भारत को इजराइल से सीखने की जरुरत है, अगर इजराइल का 10% गुण भी भारत में आ जाये तो पाकिस्तान क्या हर जिहादी देश दुनिया के नक़्शे से मिट जाये - अभी के नेताओ का तो पता नहीं, मित्रो इस पोस्ट को शेयर करो ताकि देश की युवा पीढ़ी देशभक्ति सीखे और आगे आने वाले समय में जब इन्ही युवाओं में से कोई देश का नेता बनेगा तो देश को हर मोर्चे पर सुरक्षित कर देगा...!!
" कांग्रेस मुक्त भारत "
----अरविन्द भटनागर
कभी सोचा है की प्रभु श्री राम के दादा परदादा का नाम क्या था?
नहीं तो जानिये-
1 - ब्रह्मा जी से मरीचि हुए,
2 - मरीचि के पुत्र कश्यप हुए,
3 - कश्यप के पुत्र विवस्वान थे,
4 - विवस्वान के वैवस्वत मनु हुए.वैवस्वत मनु के समय जल प्रलय हुआ था,
5 - वैवस्वतमनु के दस पुत्रों में से एक का नाम इक्ष्वाकु था, इक्ष्वाकु ने अयोध्या को अपनी राजधानी बनाया और इस प्रकार इक्ष्वाकु कुलकी स्थापना की |
6 - इक्ष्वाकु के पुत्र कुक्षि हुए,
7 - कुक्षि के पुत्र का नाम विकुक्षि था,
8 - विकुक्षि के पुत्र बाण हुए,
9 - बाण के पुत्र अनरण्य हुए,
10- अनरण्य से पृथु हुए,
11- पृथु से त्रिशंकु का जन्म हुआ,
12- त्रिशंकु के पुत्र धुंधुमार हुए,
13- धुन्धुमार के पुत्र का नाम युवनाश्व था,
14- युवनाश्व के पुत्र मान्धाता हुए,
15- मान्धाता से सुसन्धि का जन्म हुआ,
16- सुसन्धि के दो पुत्र हुए- ध्रुवसन्धि एवं प्रसेनजित,
17- ध्रुवसन्धि के पुत्र भरत हुए,
18- भरत के पुत्र असित हुए,
19- असित के पुत्र सगर हुए,
20- सगर के पुत्र का नाम असमंज था,
21- असमंज के पुत्र अंशुमान हुए,
22- अंशुमान के पुत्र दिलीप हुए,
23- दिलीप के पुत्र भगीरथ हुए, भागीरथ ने ही गंगा को पृथ्वी पर उतारा था.भागीरथ के पुत्र ककुत्स्थ थे |
24- ककुत्स्थ के पुत्र रघु हुए, रघु के अत्यंत तेजस्वी और पराक्रमी नरेश होने के कारण उनके बाद इस वंश का नाम रघुवंश हो गया, तब से श्री राम के कुल को रघु कुल भी कहा जाता है |
25- रघु के पुत्र प्रवृद्ध हुए,
26- प्रवृद्ध के पुत्र शंखण थे,
27- शंखण के पुत्र सुदर्शन हुए,
28- सुदर्शन के पुत्र का नाम अग्निवर्ण था,
29- अग्निवर्ण के पुत्र शीघ्रग हुए,
30- शीघ्रग के पुत्र मरु हुए,
31- मरु के पुत्र प्रशुश्रुक थे,
32- प्रशुश्रुक के पुत्र अम्बरीष हुए,
33- अम्बरीष के पुत्र का नाम नहुष था,
34- नहुष के पुत्र ययाति हुए,
35- ययाति के पुत्र नाभाग हुए,
36- नाभाग के पुत्र का नाम अज था,
37- अज के पुत्र दशरथ हुए,
38- दशरथ के चार पुत्र राम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न हुए |
इस प्रकार ब्रह्मा की उन्चालिसवी (39) पीढ़ी में श्रीराम का जन्म हुआ |
नोट : -अपने बच्चों को बार बार पढ़वाये और स्वयं भी जानकारी रखे धर्म को जानना हमरा कर्तव्य है। शेयर करे ताकि हर सनातनी इस जानकारी को जाने.
हमारी संकृती
पाण्डव पाँच भाई थे जिनके नाम हैं
1. युधिष्ठिर 2. भीम 3. अर्जुन
4. नकुल। 5. सहदेव
( इन पांचों के अलावा , महाबली कर्ण भी कुंती के ही पुत्र थे , परन्तु उनकी गिनती पांडवों में नहीं की जाती है )
यहाँ ध्यान रखें कि… पाण्डु के उपरोक्त पाँचों पुत्रों में से युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन
की माता कुन्ती थीं ……तथा , नकुल और सहदेव की माता माद्री थी ।
वहीँ …. धृतराष्ट्र और गांधारी के सौ पुत्र…..
कौरव कहलाए जिनके नाम हैं
1. दुर्योधन 2. दुःशासन 3. दुःसह
4. दुःशल 5. जलसंघ 6. सम
7. सह 8. विंद 9. अनुविंद
10. दुर्धर्ष 11. सुबाहु। 12. दुषप्रधर्षण
13. दुर्मर्षण। 14. दुर्मुख 15. दुष्कर्ण
16. विकर्ण 17. शल 18. सत्वान
19. सुलोचन 20. चित्र 21. उपचित्र
22. चित्राक्ष 23. चारुचित्र 24. शरासन
25. दुर्मद। 26. दुर्विगाह 27. विवित्सु
28. विकटानन्द 29. ऊर्णनाभ 30. सुनाभ
31. नन्द। 32. उपनन्द 33. चित्रबाण
34. चित्रवर्मा 35. सुवर्मा 36. दुर्विमोचन
37. अयोबाहु 38. महाबाहु 39. चित्रांग 40. चित्रकुण्डल41. भीमवेग 42. भीमबल
43. बालाकि 44. बलवर्धन 45. उग्रायुध
46. सुषेण 47. कुण्डधर 48. महोदर
49. चित्रायुध 50. निषंगी 51. पाशी
52. वृन्दारक 53. दृढ़वर्मा 54. दृढ़क्षत्र
55. सोमकीर्ति 56. अनूदर 57. दढ़संघ 58. जरासंघ 59. सत्यसंघ 60. सद्सुवाक
61. उग्रश्रवा 62. उग्रसेन 63. सेनानी
64. दुष्पराजय 65. अपराजित
66. कुण्डशायी 67. विशालाक्ष
68. दुराधर 69. दृढ़हस्त 70. सुहस्त
71. वातवेग 72. सुवर्च 73. आदित्यकेतु
74. बह्वाशी 75. नागदत्त 76. उग्रशायी
77. कवचि 78. क्रथन। 79. कुण्डी
80. भीमविक्र 81. धनुर्धर 82. वीरबाहु
83. अलोलुप 84. अभय 85. दृढ़कर्मा
86. दृढ़रथाश्रय 87. अनाधृष्य
88. कुण्डभेदी। 89. विरवि
90. चित्रकुण्डल 91. प्रधम
92. अमाप्रमाथि 93. दीर्घरोमा
94. सुवीर्यवान 95. दीर्घबाहु
96. सुजात। 97. कनकध्वज
98. कुण्डाशी 99. विरज
100. युयुत्सु
( इन 100 भाइयों के अलावा कौरवों की एक बहनभी थी… जिसका नाम""दुशाला""था,
जिसका विवाह"जयद्रथ"सेहुआ था )
"श्री मद्-भगवत गीता"के बारे में
ॐ . किसको किसने सुनाई?
उ. श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सुनाई।
ॐ . कब सुनाई?
उ.- आज से लगभग 7 हज़ार साल पहले सुनाई।
ॐ. भगवान ने किस दिन गीता सुनाई?
उ.- रविवार के दिन।
ॐ. कोनसी तिथि को?
उ.- एकादशी
ॐ. कहा सुनाई?
उ.- कुरुक्षेत्र की रणभूमि में।
ॐ. कितनी देर में सुनाई?
उ.- लगभग 45 मिनट में
ॐ. क्यू सुनाई?
उ.- कर्त्तव्य से भटके हुए अर्जुन को कर्त्तव्य सिखाने के लिए और आने वाली पीढियों को धर्म-ज्ञान सिखाने के लिए।
ॐ. कितने अध्याय है?
उ.- कुल 18 अध्याय
ॐ. कितने श्लोक है?
उ.- 700 श्लोक
ॐ. गीता में क्या-क्या बताया गया है?
उ.- ज्ञान-भक्ति-कर्म योग मार्गो की विस्तृत व्याख्या की गयी है, इन मार्गो पर चलने से व्यक्ति निश्चित ही परमपद का अधिकारी बन जाता है।
ॐ. गीता को अर्जुन के अलावा
और किन किन लोगो ने सुना?
उ.- धृतराष्ट्र एवं संजय ने
ॐ. अर्जुन से पहले गीता का पावन ज्ञान किन्हें मिला था?
उ.- भगवान सूर्यदेव को
ॐ. गीता की गिनती किन धर्म-ग्रंथो में आती है?
उ.- उपनिषदों में
ॐ. गीता किस महाग्रंथ का भाग है....?
उ.- गीता महाभारत के एक अध्याय शांति-पर्व का एक हिस्सा है।
ॐ. गीता का दूसरा नाम क्या है?
उ.- गीतोपनिषद
ॐ. गीता का सार क्या है?
उ.- प्रभु श्रीकृष्ण की शरण लेना
ॐ. गीता में किसने कितने श्लोक कहे है?
उ.- श्रीकृष्ण जी ने- 574
अर्जुन ने- 85
धृतराष्ट्र ने- 1
संजय ने- 40.
अपनी युवा-पीढ़ी को गीता जी के बारे में जानकारी पहुचाने हेतु इसे ज्यादा से ज्यादा शेअर करे। धन्यवाद
अधूरा ज्ञान खतरना होता है।
33 करोड नहीँ 33 कोटी देवी देवता हैँ हिँदू
धर्म मेँ।
कोटि = प्रकार।
देवभाषा संस्कृत में कोटि के दो अर्थ होते है,
कोटि का मतलब प्रकार होता है और एक अर्थ करोड़ भी होता।
हिन्दू धर्म का दुष्प्रचार करने के लिए ये बात उडाई गयी की हिन्दुओ के 33 करोड़ देवी देवता हैं और अब तो मुर्ख हिन्दू खुद ही गाते फिरते हैं की हमारे 33 करोड़ देवी देवता हैं...
कुल 33 प्रकार के देवी देवता हैँ हिँदू धर्म मे :-
12 प्रकार हैँ
आदित्य , धाता, मित, आर्यमा,
शक्रा, वरुण, अँश, भाग, विवास्वान, पूष,
सविता, तवास्था, और विष्णु...!
8 प्रकार हे :-
वासु:, धर, ध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष और प्रभाष।
11 प्रकार है :-
रुद्र: ,हर,बहुरुप, त्रयँबक,
अपराजिता, बृषाकापि, शँभू, कपार्दी,
रेवात, मृगव्याध, शर्वा, और कपाली।
एवँ
दो प्रकार हैँ अश्विनी और कुमार।
कुल :- 12+8+11+2=33 कोटी
अगर कभी भगवान् के आगे हाथ जोड़ा है
तो इस जानकारी को अधिक से अधिक
लोगो तक पहुचाएं। ।
१ हिन्दु हाेने के नाते जानना ज़रूरी है
This is very good information for all of us ... जय श्रीकृष्ण ...
अब आपकी बारी है कि इस जानकारी को आगे बढ़ाएँ ......
अपनी भारत की संस्कृति
को पहचाने.
ज्यादा से ज्यादा
लोगो तक पहुचाये.
खासकर अपने बच्चो को बताए
क्योकि ये बात उन्हें कोई नहीं बताएगा...
दो पक्ष-
कृष्ण पक्ष ,
शुक्ल पक्ष !
तीन ऋण
देव ऋण ,
पितृ ऋण ,
ऋषि ऋण !
चार युग -
सतयुग ,
त्रेतायुग ,
द्वापरयुग ,
कलियुग !
चार धाम -
द्वारिका ,
बद्रीनाथ ,
जगन्नाथ पुरी ,
रामेश्वरम धाम !
चारपीठ -
शारदा पीठ ( द्वारिका )
ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम )
गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी ) ,
शृंगेरीपीठ !
चार वेद
ऋग्वेद ,
अथर्वेद ,
यजुर्वेद ,
सामवेद !
चार आश्रम
ब्रह्मचर्य ,
गृहस्थ ,
वानप्रस्थ ,
संन्यास !
चार अंतःकरण -
मन ,
बुद्धि ,
चित्त ,
अहंकार !
पञ्च गव्य -
गाय का घी ,
दूध ,
दही ,
गोमूत्र ,
गोबर !
पञ्च देव -
गणेश ,
विष्णु ,
शिव ,
देवी ,
सूर्य !
पंच तत्त्व -
पृथ्वी ,
जल ,
अग्नि ,
वायु ,
आकाश !
छह दर्शन -
वैशेषिक ,
न्याय ,
सांख्य ,
योग ,
पूर्व मिसांसा ,
दक्षिण मिसांसा !
सप्त ऋषि -
विश्वामित्र ,
जमदाग्नि ,
भरद्वाज ,
गौतम ,
अत्री ,
वशिष्ठ और कश्यप!
सप्त पुरी -
अयोध्या पुरी ,
मथुरा पुरी ,
माया पुरी ( हरिद्वार ) ,
काशी ,
कांची
( शिन कांची - विष्णु कांची ) ,
अवंतिका और
द्वारिका पुरी !
आठ योग -
यम ,
नियम ,
आसन ,
प्राणायाम ,
प्रत्याहार ,
धारणा ,
ध्यान एवं
समािध !
आठ लक्ष्मी -
आग्घ ,
विद्या ,
सौभाग्य ,
अमृत ,
काम ,
सत्य ,
भोग ,एवं
योग लक्ष्मी !
नव दुर्गा -
शैल पुत्री ,
ब्रह्मचारिणी ,
चंद्रघंटा ,
कुष्मांडा ,
स्कंदमाता ,
कात्यायिनी ,
कालरात्रि ,
महागौरी एवं
सिद्धिदात्री !
दस दिशाएं -
पूर्व ,
पश्चिम ,
उत्तर ,
दक्षिण ,
ईशान ,
नैऋत्य ,
वायव्य ,
अग्नि
आकाश एवं
पाताल !
मुख्य ११ अवतार -
मत्स्य ,
कच्छप ,
वराह ,
नरसिंह ,
वामन ,
परशुराम ,
श्री राम ,
कृष्ण ,
बलराम ,
बुद्ध ,
एवं कल्कि !
बारह मास -
चैत्र ,
वैशाख ,
ज्येष्ठ ,
अषाढ ,
श्रावण ,
भाद्रपद ,
अश्विन ,
कार्तिक ,
मार्गशीर्ष ,
पौष ,
माघ ,
फागुन !
बारह राशी -
मेष ,
वृषभ ,
मिथुन ,
कर्क ,
सिंह ,
कन्या ,
तुला ,
वृश्चिक ,
धनु ,
मकर ,
कुंभ ,
कन्या !
बारह ज्योतिर्लिंग -
सोमनाथ ,
मल्लिकार्जुन ,
महाकाल ,
ओमकारेश्वर ,
बैजनाथ ,
रामेश्वरम ,
विश्वनाथ ,
त्र्यंबकेश्वर ,
केदारनाथ ,
घुष्नेश्वर ,
भीमाशंकर ,
नागेश्वर !
पंद्रह तिथियाँ -
प्रतिपदा ,
द्वितीय ,
तृतीय ,
चतुर्थी ,
पंचमी ,
षष्ठी ,
सप्तमी ,
अष्टमी ,
नवमी ,
दशमी ,
एकादशी ,
द्वादशी ,
त्रयोदशी ,
चतुर्दशी ,
पूर्णिमा ,
अमावास्या !
स्मृतियां -
मनु ,
विष्णु ,
अत्री ,
हारीत ,
याज्ञवल्क्य ,
उशना ,
अंगीरा ,
यम ,
आपस्तम्ब ,
सर्वत ,
कात्यायन ,
ब्रहस्पति ,
पराशर ,
व्यास ,
शांख्य ,
लिखित ,
दक्ष ,
शातातप ,
वशिष्ठ !
जमिनीवर बसून का जेवण जेवावे...?
●जमिनीवर बसून जेवणाचे 10 फायदे
१- पचन सुधारते
जमिनीवर मांडी घालून बसल्याने, अर्धपद्मासनाची
स्थिती निर्माण होते. तसेच जमिनीवर ताट असल्याने
जेवणाचा घास घेण्यासाठी वाकावे लागते या सतत
होणार्या शारीरिक हालचालीमुळे पोटाजवळील
स्नायूंना चालना मिळते व पचनाची क्रियादेखील सुधारते.
२-वजन घटवण्यास मदत होते
जमिनीवर बसून जेवल्याने, वजन कमी होण्यासही मदत होते.
वजन वाढण्याचे मुख्य कारण म्हणजे प्रमाणापेक्षा अधिक
खाणे. जमिनीवर बसून जेवताना ‘वेगस नर्व्ह’ (पोटाकडून
मेंदूला संकेत देणारी) भूक व जेवणाचे प्रमाण योग्यप्रकारे
राखू शकते. टेबलापेक्षा जमिनीवर बसून जेवल्याने, जेवणाचा
वेग मंदावतो व पोट आणि मेंदूतील समन्वयता सुधारते.
परिणामी अतिप्रमाणात खाण्याची वृत्ती कमी होते व
वजनही काबूत राहते.
३-लवचिकता वाढवते
पद्मासनात बसल्याने, पाठीचे, कमरेतील तसेच पोटाजवळील
स्नायूंवर ताण आल्याने पचनसंस्थेचा मार्ग सुधारतो. अशा
स्थितीत बसल्याने पोटावर ताण येण्याऐवजी जेवण
पचण्यास व ग्रहण करण्यास मदतच होते. परिणामी
पोटाजवळील स्नायूंवर ताण आल्याने शरीर लवचिक व
आरोग्यदायी बनण्यास मदत होते.
४-मन शांत होते व खाण्यावर लक्ष केंद्रित होते
जमिनीवर बसून जेवल्याने मेंदू शांत होतो व तुमचे सारे लक्ष
जेवणाकडेच राहते. मनाची अस्थिरता कमी झाल्याने,
जेवणातून मिळणारी पोषणतत्त्वे शरीर अधिक उत्तमप्रकारे
ग्रहण करण्यास समर्थ होते.
५-कुटुंबातील सदस्यांशी जवळीक वाढते
दिवसातील किमान एका जेवणाचा आपल्या कुटूंबासोबत
जरूर आनंद घ्यावा.दिवसभरातील क्षीण व ताणतणाव हलका
होतो. तसेच एकमेकांशी बोलल्याने, काही समस्यांतून मार्ग
शोधण्यास मदत होते व नकळत कुटूंबातील सदस्यांशी
जवळीक वाढते.
६-शरीराची स्थिती (पॉश्चर) सुधारते
शरीराची स्थिती उत्तम राखणे हे निरोगी आरोग्याचे गमक
आहे.शरीरातील काही स्नायू व सांध्यांवरील अतिरिक्त
ताण कमी करून थकवा कमी होण्यासदेखील मदत होते.
जमिनीवर बसून जेवताना पाठीचा कणा ताठ राहतो व
पोट, खांदा व पाठीच्या स्नायूंची योग्य प्रमाणात
हालचाल होते.
७-दीर्घायुषी बनवते
ही अतिशयोक्ती नाही. जमिनीवर बसून जेवल्याने आयुष्य
वाढते. ‘European Journal of Preventive Cardiology’च्या
अहवालात प्रसिद्ध केलेल्या अभ्यासानुसार, जमिनीवर
मांडी घालून बसलेली व्यक्ती जर कशाचाही आधार न घेता
उठली तर त्यांचे आयुष्यमान अधिक आहे, असे समजावे. कारण
अशा स्थितीतून उठण्यासाठी शरीराची लवचिकता अधिक
असणे गरजेचे आहे. आणि जी व्यक्ती उठू शकत नाही त्यांचा
मृत्यू नजीकच्या 6 वर्षात होण्याची शक्यता 6.5 पटीने
अधिक असते.
८-गुडघे व कमरेतील सांधे मजबूत होतात
Yoga for Healing या पुस्तकाचे लेखक पी.एस. वेंकटेशवरा
यांच्यामते, पद्मासनामुळे शरीर निरोगी राहण्यास मदत
होते. पचन संस्थेसोबतच सांधेदुखीचा त्रास होत नाही.
गुडघा, घोटा व कंबरेतील सांधे लवचिक राहिल्याने अनेक
विकार दूर होण्यास मदत होते. जमिनीवर बसल्याने
स्नायूंबरोबर सांध्यांची लवचिकतादेखील वाढते.
९-चंचलता कमी होते
मांडी घालून किंवा पद्मासनात बसल्याने नसांमधील
थकवा कमी होतो. म्हणूनच जेवताना जमिनीवर मांडी
घालून बसण्याचा सल्ला दिला जातो. यामुळे मन, मेंदू व
परिणामी शरीरातील त्रास कमी होतात.
१०-हृदयाला होणारा रक्तपुरवठा सुधारतो
काही वेळेस जेवल्यानंतर तुम्हाला गरम होते किंवा घाम
आल्याचे आठवते का ? हो हे शक्य आहे. कारण अन्नाचे पचन
होण्यासाठी शरीराला उर्जेची अधिक गरज असते. खुर्चीवर
बसण्याऐवजी जमिनीवर बसून जेवल्याने शरीरातील
रक्तप्रवाह सुधारतो. तसेच पचनही सुधारते.
मंगळवार, १ डिसेंबर, २०१५
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लेखक : कृष्णाजी अनंत सभासद
लेखक : ताराबाई शिन्दे
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3. आज्ञापत्र
4. आसे होते मोगल
5. इस्ट इंडिया कंपनीचा पेशवे दरबाराशी फारशी पत्रव्यवहार
6. उत्तरकालीन मुघल खंड दुसरा
7. औरंगजेबाचा इतिहास
8. क्षत्रियकुलावतंस छत्रपती शिवाजीमहाराज यांचे चरित्र
9. क्षत्रियांचा प्राचीन इतिहास
10. खरे जंत्री ( शिवकालीन संपूर्ण शकावली ) १६२९ ते १७२८
11. घोरपडे घराण्याचा इतिहास
12. छत्रपती शिवाजी महाराज
13. तंजावरचे मराठे राजे
14. ताराबाई आणि संभाजी १७३८ – १७६१
15. तेरा पोवाडे
16. दंडनीती
17. दिन-विशेष
18. दिल्लीच्या शहाजहानचा इतिहास
19. निजाम पेशवे संबंध १८ वे शतक
20. पवनाकाठचा धोंडी
21. पानिपतची बखर
22. पुणे अखबार भाग १
23. पुणे अखबार भाग 2
24. पुण्यश्लोक छत्रपती शिवाजी भाग २
25. पुण्यश्लोक छत्रपती शिवाजी भाग ३
26. पेशवाईचा मध्यान्ह
27. पेशवाईची प्राणप्रतिष्ठा
28. पेशवाईचे दिव्य तेज
29. पेशवाईच्या सावलीत
30. पेशवाईतील पश्चिम दिग्विजय
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34. पोर्तुगीज मराठा संबंध
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38. भाऊसाहेबांची बखर
39. भारत इतिहास संशोधक मंडळ अहवाल शके १८३२
40. भारतवर्षाचा संक्षिप्त इतिहास
41. भारतीय लिपींचे मौलिक एकरूप
42. मराठांच्या राज्य कथा
43. मराठी दफ्तर रुमाल दुसरा
44. मराठी बखर गद्य
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46. मराठे व इंग्रज आवृत्ती तिसरी
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49. मराठ्यांची बखर
50. मराठ्यांचे साम्राज्य
51. मराठ्यांच्या इतिहासाची साधने पोर्तुगीज दफ्तर खंड तिसरा १६६३ – १७३९
52. मराठ्यांच्या उत्तरेतील मोहिमा १७२० – १७४०
53. मराठ्यांच्या लढायांचा इतिहास १८०२ – १८१८
54. महाराणा प्रताप
55. महाराष्ट्र इतिहासमंजरी
56. महाराष्ट्र दर्शन
57. महाराष्ट्र व गोवे शिलालेख
58. महाराष्ट्राचा इतिहास मराठा कालखंड भाग २ (१७०७ ते १८१८ )
59. महाराष्ट्राचा पत्ररूप इतिहास
60. महाराष्ट्रातले खलपुरूष घाशीराम कोतवाल
61. महाराष्ट्रातील पुरातत्व
62. महाराष्ट्रातील स्वतंत्र लढे
63. महेश्वर दरबारची बातमीपत्रे
64. माठगावचा शिलालेख
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67. मुघल साम्राज्याचा ऱ्हास भाग १
68. मुलखावेगळा राजा
69. मुसलमान सुफी संतांचे मराठी साहित्य
70. मुसलमानपुर्व महाराष्ट्र इ.पु. २०० ते इ.स. १३१८
71. मुसलमानी रियासत
72. मोगल दरबारची बातमीपत्रे खंड २
73. मोगल दरबारची बातमीपत्रे
74. म्हणे लढाई संपली !
75. राजपूत संस्कृती
76. राजा राममोहन राय
77. रायगडची जीवनकथा पहिली आवृत्ती
78. रायगडची जीवनकथा
79. वंश आणि वंशवाद
80. वसईची मोहीम १७३७ ते १७३९
81. शककर्ता शालिवाहन
82. शिव - चरित्र – निबंधावली
83. शिवकाल १६३० ते १७०७
84. शिवकालीन महसुल व्यवस्था
85. शिवराजभूषणम
86. शिवाजीचारित्र
87. श्री छत्रपती राजाराम महाराज यांचे चरित्र
88. श्री भाऊंच्या वीरकथा
89. श्री शिवभारत
90. श्री शिवराज्याभिषेक प्रयोग
91. श्रीमंत महाराज भोसले यांची बखर
92. श्रीमछत्रपति शाहूमहाराज
93. श्रीरामदासांची एतिहासिक कागदपत्रे
94. सनपुरिचि बखर
95. समरांगण
96. सह्याद्रीच्या पायथ्याशी आक्रमण १ ले
97. स्थलनामकोश
98. हि रामाची आयोध्या
99. हिंदुस्तानची सामाजिक उत्क्रांती १७९० – १९४०
100. हुतात्मा दामोदर हरी चाफेकर यांचे आत्मवृत्त
101. हैदराबाद स्वतंत्र संग्राम